किस्मत फूल की
बदकिस्मत है वो फूल
जो गिरकर किसी डाली से
बन गया शरदा सुमन किसी शव का
खुश किस्मत है वो फूल
जो टूटा तो किसी डाली से
मगर सजकर किसी दुल्हन के जुढ़े मै महक गया
है फितरत फूल की बिखेरना सुगंध
चाहे वो छुपाये दुर्गन्ध किसी शव की
या किसी दुल्हन के रूप को महकाने की हो
खोकर सुगंध कुचला जाना है नियति उसकी
वो बिस्तर किसी दुल्हन का हो
या फिर जगह किसी शव के दफ़नाने की हो
गुजरती क्या होगी
उस टूटे मुरझाये तनहा फूल पर
इसकी चिंता क्यों इस बदगुमान ज़माने को हो
है ज़माने की नज़र मै
फूल की किस्मत यही
फिर दुःख क्यों उसके टूट कर कुम्लाह्कर मुरझा जाने मै हो
लेखक परवीन चंदर झांझी
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