स्वार्थी
बनाया था शाहजहाँ ने
याद में मुमताज के एक ताज
अपने पर उसको नहीं था उसको यह विश्वास
कि बाद मरने के भी कर पायेगा उसे प्यार
मेने भी दिल में अपने बनाया है इक ताज
जलकर जो संग मेरे हो जायगा इक दिन राख
स्वार्थी हु मै शायद इतना कि चाहता नहीं ये बात
के बाद मरने के भी मेरे करे कोई तुमको याद.
लेखक परवीन चंदर झांजी
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