सचा साथी
चिता पर लेटे इन्सान से
कहा लकढ़ी ने यू हंसकर
तोढ़ कर पढ़ से मुझको
बहूत इतराता था तू
याद कर
केसे काटा मुझे तुने
सुखाया मुझे तुने
आ लेटा हें यहाँ सब दुनिया छोढ़कर
करके आग के हवाले
चले रिश्ते दार ये घरवाले
रहूंगी साथ मै तेरे जलूँगी साथ मै तेरे
राख बनकर भी रहूंगी मै साथ तेरे
तेरी यात्रा के इस अंतिम मोढ़ तक
लेखक परवीन चंदर झांझी
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