Thursday, November 26, 2009

SEHAR

न तू मैं हूँ जलती आग,
जिससे तुम जल जाओ
 न मैं हूँ बुझी राख
जिससे तुम भूल जाओ
मैं तो हूँ एक एक  गीली जलती लकढ़ी ,
मेरे  जलाए   जाने  का एहसास  मुझे  बुझने    नहीं  देता,
तुम्हे  मेरे  जलने  का  अहसास
कभी  सोने  नहीं  देता ,
मै   रात  भर  जलकर  भी  बुझ  नहीं  पाया ,
मुझे  देखकर  जलता  तुम ,
रात  भर  जग   कर  सो   नही   पाए ,
बस  इसी  कशमश  मे  जिन्दगी  की  सेहर  हो  गयी.