न तू मैं हूँ जलती आग,
जिससे तुम भूल जाओ
मैं तो हूँ एक एक गीली जलती लकढ़ी ,
मेरे जलाए जाने का एहसास मुझे बुझने नहीं देता,
तुम्हे मेरे जलने का अहसास
कभी सोने नहीं देता ,
मै रात भर जलकर भी बुझ नहीं पाया ,
मुझे देखकर जलता तुम ,
रात भर जग कर सो नही पाए ,
बस इसी कशमश मे जिन्दगी की सेहर हो गयी.
जिससे तुम जल जाओ
न मैं हूँ बुझी राखजिससे तुम भूल जाओ
मैं तो हूँ एक एक गीली जलती लकढ़ी ,
मेरे जलाए जाने का एहसास मुझे बुझने नहीं देता,
तुम्हे मेरे जलने का अहसास
कभी सोने नहीं देता ,
मै रात भर जलकर भी बुझ नहीं पाया ,
मुझे देखकर जलता तुम ,
रात भर जग कर सो नही पाए ,
बस इसी कशमश मे जिन्दगी की सेहर हो गयी.